अल्मोड़ा जिले में पंचायत चुनाव की ड्यूटी से बचने के लिए सरकारी कर्मचारी तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। कर्मचारियों का यह रवैया चुनाव अधिकारियों और प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है, क्योंकि अब तक 80 से अधिक कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी कटवाने के लिए आवेदन किए हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई कर्मचारी खुद को बीमार बताकर या परिवार के किसी सदस्य के बीमार होने की बात कहकर ड्यूटी से छूट की मांग कर रहे हैं। वहीं, कुछ कर्मचारी विधायक, सांसद, और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी अपनी ड्यूटी कटवाने के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं।
चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए कर्मचारियों की बहानेबाजी
पंचायत चुनाव के लिए प्रशासन ने कुल 2,198 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है, जो चुनाव प्रक्रिया के दो चरणों में अपनी सेवाएं देंगे। लेकिन, ड्यूटी के लिए नियुक्त कर्मचारियों में से कई ने अपने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए ड्यूटी से छूट की मांग की है। कई कर्मचारी खुद को कमर दर्द, गर्दन दर्द, मधुमेह जैसी बीमारियों का हवाला दे रहे हैं। वहीं, कुछ कर्मचारियों ने यह कहकर ड्यूटी से छुट्टी मांगी है कि उनके माता-पिता या बच्चे अकेले हैं और उन्हें देखभाल की जरूरत है।
कर्मचारियों द्वारा बहानेबाजी के मामलों में इजाफा होता जा रहा है। इस संदर्भ में, सरकारी अस्पतालों में भी कर्मचारियों की भीड़ बढ़ गई है, जो मेडिकल प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए डॉक्टरों से संपर्क कर रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों द्वारा चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए चिकित्सा प्रमाणपत्र हासिल करने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं।
अस्पतालों में सरकारी कर्मचारियों का बढ़ता दबाव
अल्मोड़ा जिला अस्पताल में इस समय कर्मचारियों का दबाव बढ़ गया है, जो चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए डॉक्टरों से मेडिकल प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए आ रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. हरीश ने इस संबंध में बताया कि कर्मचारियों द्वारा मेडिकल बनाने की मांग को लेकर अस्पताल में काफी भीड़ देखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं कर्मचारियों को मेडिकल प्रमाणपत्र दिए जा रहे हैं, जिनकी वास्तविक चिकित्सा जांच के बाद बीमारी की पुष्टि होती है। डॉ. हरीश ने यह भी कहा कि जिन्हें लगता है कि वे बहाना बना रहे हैं, उनके लिए मेडिकल प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा रहा है।
ड्यूटी से बचने के लिए जुगाड़ लगवाने का मामला
कुछ कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी से बचने के लिए स्थानीय विधायक, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी मदद मांगी है। ऐसे कर्मचारी चुनाव ड्यूटी से मुक्त होने के लिए विभिन्न तरीके अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन कर्मचारियों का यह प्रयास प्रशासन के लिए एक नई चुनौती बन गया है, क्योंकि ऐसे मामले चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
डीएम की प्रतिक्रिया
इस मामले पर जिलाधिकारी (डीएम) आलोक कुमार पांडे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए आवेदन करने वाले कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी प्रार्थनापत्र और मेडिकल प्रमाणपत्रों की गहराई से जांच की जा रही है। डीएम ने यह भी कहा कि जो कर्मचारी बहाने बना रहे हैं, उनकी ड्यूटी कतई नहीं कटवायी जाएगी। उन्होंने प्रशासन के सभी अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि किसी भी कर्मचारी को बिना उचित कारण के ड्यूटी से छूट न मिले।
प्रशासन की निगरानी और कड़ी जांच
डीएम आलोक कुमार पांडे ने यह स्पष्ट किया कि चुनाव ड्यूटी में कोई भी लापरवाही नहीं बरती जाएगी और जो कर्मचारी चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए फर्जी बहाने बना रहे हैं, उन्हें किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी कर्मचारियों की ड्यूटी को गंभीरता से लें और किसी भी प्रकार के दबाव या जुगाड़ के सामने न झुकें।
निष्कर्ष
इस समय अल्मोड़ा जिले में पंचायत चुनाव ड्यूटी को लेकर कर्मचारियों द्वारा उठाए जा रहे बहाने प्रशासन के लिए एक बड़ा सिरदर्द साबित हो रहे हैं। चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए कर्मचारियों की बढ़ती बहानेबाजी न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रही है, बल्कि यह चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठा सकती है। हालांकि, जिलाधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मामले की गंभीरता को समझते हुए स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं और चुनाव ड्यूटी से छूट पाने के लिए दिए गए सभी आवेदन और प्रमाणपत्रों की जांच कर रहे हैं।
अगर समय रहते प्रशासन इस मुद्दे को सुलझाने में सफल रहता है, तो चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अड़चन नहीं आएगी और कर्मचारी अपनी ड्यूटी सही तरीके से निभा पाएंगे।








