किश्तवाड़ के चशोती गांव में 14 अगस्त को बादल फटने से आई भीषण आपदा के पांचवें दिन भी राहत और बचाव कार्य जारी हैं। स्थानीय अधिकारियों और बचाव दल ने भारी मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर अभियान तेज कर दिया है। अभियान में अर्थ-मूवर, ऑल-टेरेन वाहन और खोजी कुत्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बादल फटने की घटना में अब तक 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें तीन सीआईएसएफ कर्मी और एक विशेष पुलिस अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। नई सूची के अनुसार, लगभग 50 लोग अभी भी लापता हैं। इस आपदा ने गांव के अस्थायी बाजार, वार्षिक मचैल माता यात्रा के लंगर स्थल, 16 घर, सरकारी इमारतें, तीन मंदिर, चार पनचक्की, 30 मीटर लंबा पुल और दर्जनों वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए।
बचाव दल में पुलिस, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआईएसएफ, बीआरओ, नागरिक प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवक शामिल हैं। रेनकोट पहनकर टीम भारी बारिश के बावजूद लंगर स्थल और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य कर रही है। सेना ने चशोती नाले पर बेली ब्रिज बनाकर मंदिर और गांव के बीच संपर्क स्थापित किया है, जिससे राहत और बचाव कार्य में तेजी आई है।
पिछले दो दिनों में बचाव दल ने नियंत्रित विस्फोटों के जरिए खोज में बाधा डाल रहे बड़े पत्थरों को हटाया। डॉग स्क्वॉड सहित कई उपकरणों का उपयोग कर मलबे में जीवन की तलाश की जा रही है। अधिकारी बताते हैं कि मचैल माता यात्रा, जो 25 जुलाई से 5 सितंबर तक चलती है, सोमवार को लगातार छठे दिन स्थगित रही। मंदिर तक 8.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा किश्तवाड़ से लगभग 90 किलोमीटर दूर चशोती से शुरू होती है।
आपदा की भयावहता के बावजूद बचाव दल और स्थानीय प्रशासन पूरी मेहनत के साथ जीवित बचे लोगों की तलाश और राहत कार्य जारी रखे हुए हैं।








