देहरादून। मकर संक्रांति और उत्तरायणी पर्व के अवसर पर बुधवार को उत्तराखंड के प्रमुख नदी घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही हरिद्वार, देवप्रयाग, विष्णु प्रयाग सहित अन्य तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालु स्नान कर पूजा-अर्चना में जुटे रहे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही कुमाऊं और गढ़वाल अंचल में पुण्य स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए सुख-समृद्धि की कामना की।
सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश के साथ ही कुमाऊं की काशी कही जाने वाली बागेश्वर में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने सरयू–गोमती संगम में माघी स्नान कर बाबा बागनाथ के दर्शन किए। गढ़वाल, दारमा, जोहार, व्यास और दानपुर समेत दूर-दराज क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु मंगलवार रात से ही बागेश्वर पहुंच गए थे।
रातभर श्रद्धालुओं ने झोड़ा–चांचरी गाकर, अलाव तापकर और भजन-कीर्तन में समय बिताया। भोर होते ही श्रद्धालुओं ने संगम तट पर स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया, सरयू पूजन किया और बागनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। बागनाथ मंदिर में सुबह तीन बजे से ही भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं। दिनभर मंदिर और घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सरयू तट पर महिला और पुरुष पुलिस कर्मियों के साथ जल पुलिस और अग्निशमन दल की तैनाती की गई थी। मकर संक्रांति के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने नदी किनारे मुंडन, जनेऊ संस्कार और पितरों का तर्पण भी किया।
पंडित कैलाश उपाध्याय ने बताया कि मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होते हैं, इसलिए इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है। सरयू–गोमती संगम में स्नान कर बाबा बागनाथ के दर्शन करने से कष्टों का निवारण और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
उधर उत्तरायणी मेले के तहत जागरण की रात नुमाइश मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पहली बार शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति हुई, जिसमें प्रसिद्ध गायक पंकज उप्रेती ने राग मारवा पर आधारित बागनाथ स्तुति प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। चौक बाजार में झोड़ा–चांचरी और सरयू तट पर माघी खिचड़ी प्रसाद वितरण से माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।








