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धरना स्थल से उठी गरज: “गरीब विरोधी है सरकार, हक छीनकर रहेंगे

बागजाला गांव में अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन गुरुवार को 18वें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने उनके मूलभूत अधिकारों को छीनकर गरीबों और भूमिहीनों को हाशिये पर धकेल दिया है।

धरना स्थल पर मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे अखिल भारतीय किसान महासभा के वरिष्ठ किसान नेता आनंद सिंह सिजवाली ने कहा कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार गरीब विरोधी है और यह गरीबों को अधिकार देने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भूमिहीनों और गरीबों को अपना हक लड़कर लेना होगा। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बागजाला आंदोलन ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और यदि आप डटे रहेंगे तो जीत निश्चित है।

पूर्व प्रधानाचार्य गणेश राम ने भी धरना स्थल पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने जानबूझकर बागजाला गांव को पंचायत के अधिकार से वंचित कर दिया है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि अपने मालिकाना अधिकार और पंचायत प्रतिनिधि चुनने के अधिकार को पाने के लिए संघर्ष को और तेज करना होगा।

गुरुवार को हुए धरने में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। इसमें आनंद सिंह नेगी, गणेश राम, विमला रौथाण, निर्मला शाही, दान सिंह मेहरा, डॉ. उर्मिला रैस्वाल, विमला देवी, हेमा देवी, डॉ. कैलाश पांडेय, मीना भट्ट, दीवान सिंह बर्गली, मोहम्मद परवेज, हरदित्ता सिंह, किरण प्रजापति, हरक सिंह बिष्ट, भगवती गोस्वामी, हरि गिरी, सोहन लाल, गोकुल सिंह, रियासत अली, शेर खान, सबीना, भोला सिंह, आजम, उमा देवी, आशा, नसीम अहमद, जीवंती, सरोज, बैजन्ती, नरेंद्र सिंह बिष्ट, एम.एस. मलिक, दीवान सिंह बिष्ट, रेखा देवी, रईस, दीपा, पुष्पा, चंपा, दिनेश चंद्र, अंबा दत्त, मन्नू देवी, शकुंतला, तुलसी, मुस्लिमा और समीर समेत अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों ने दोहराया कि उनका संघर्ष सिर्फ भूमि के मालिकाना अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंचायत चुनाव का अधिकार और विकास कार्यों पर लगी रोक हटाने जैसी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर है। आंदोलनकारी ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना इसी तरह जारी रहेगा।

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