गोपेश्वर, 25 अगस्त। चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के दूरस्थ गांव वाण की बेटी भागीरथी बिष्ट ने रविवार को हैदराबाद में आयोजित प्रतिष्ठित मैराथन दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। 23 वर्षीय भागीरथी ने 42 किलोमीटर लंबी दौड़ को महज 2 घंटे 51 मिनट में पूरा किया और पहला स्थान प्राप्त किया। इस शानदार उपलब्धि पर उन्हें तीन लाख रुपये की धनराशि और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
भागीरथी की इस सफलता से न केवल उनके गांव वाण बल्कि पूरे चमोली जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। लोग उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। उनके कोच सुनील शर्मा, जो हिमाचल प्रदेश के सिरमौर के रहने वाले और खुद एक अंतरराष्ट्रीय मैराथन धावक हैं, ने बताया कि भागीरथी की यह जीत उनके कठिन परिश्रम और अनुशासन का नतीजा है। उन्होंने पहले भी ईरान सहित देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कई मैराथनों में भाग लिया है और कई बार प्रथम स्थान हासिल किया है।
भागीरथी की कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। बचपन में ही पिता का साया उनके सिर से उठ गया था। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी भागीरथी ने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन आगे बढ़ाया। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ घर के सारे काम किए और भाईयों की अनुपस्थिति में खेतों में हल तक खुद चलाया। इन कठिन हालातों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया और एथलेटिक्स में अपनी मेहनत जारी रखी।
भागीरथी का कहना है कि उनकी मंजिल यहीं खत्म नहीं होती। उनका सपना है कि एक दिन वह ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करें और देश के लिए मैराथन में गोल्ड मेडल जीतकर तिरंगे की शान बढ़ाएं। उनकी यह लगन और उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।








