झारखंड के रामगढ़ जिले में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) बिरहोर समुदाय की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन के निर्देश पर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) द्वारा पतरातू प्रखंड के दाडीडीह गांव स्थित बिरहोर टोला की 11 महिलाओं को बकरी एवं मुर्गी पालन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
यह सहायता पंचायत कोतो के अंतर्गत संचालित “बिरहोर आजीविका सखी मंडल” की महिला सदस्यों को दी गई। योजना का उद्देश्य बिरहोर समुदाय की महिलाओं को पशुपालन आधारित आजीविका से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना तथा आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी और मुर्गी पालन को आय सृजन का प्रभावी एवं टिकाऊ माध्यम माना जाता है, जिससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
JSLPS द्वारा महिलाओं को चक्रीय निधि (रिवॉल्विंग फंड) के रूप में 15 हजार रुपये, सामुदायिक निवेश निधि (CIF) के तहत 50 हजार रुपये तथा असुरक्षित परिवार निधि (VRF) के अंतर्गत प्रति परिवार 5 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई। कुल मिलाकर समूह को 55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। इसके अलावा महिलाओं को पोषण वाटिका विकसित करने के लिए बीज किट और रस्सी निर्माण के लिए बोरे भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसर मिलेंगे।
समूह की अध्यक्ष सोहरी देवी ने बताया कि इस सहायता से महिलाओं के परिवारों की आय में वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिति बेहतर बनेगी। उन्होंने कहा कि इस पहल ने समुदाय की महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया है तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई प्रेरणा मिली है।
उल्लेखनीय है कि बिरहोर समुदाय झारखंड के सबसे कमजोर जनजातीय समूहों में शामिल है, जो लंबे समय से वन आधारित संसाधनों पर निर्भर रहा है। ऐसे में JSLPS और जिला प्रशासन की यह पहल बिरहोर परिवारों को मुख्यधारा की आजीविका गतिविधियों से जोड़ने और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।







