भुरकुंडा रेलवे स्टेशन साइडिंग में बुधवार को हुए एक दर्दनाक हादसे ने कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साइडिंग में कार्यरत चालक जितेंद्र नायक की पेलोडर मशीन के पहिए के नीचे दबकर मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि मृतक का सिर बुरी तरह कुचल गया। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है, जबकि परिजन और स्थानीय लोग प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार 45 वर्षीय जितेंद्र नायक बरकाकाना क्षेत्र के बुजुर्ग जमीरा ओपी इलाके के निवासी थे और भुरकुंडा रेलवे साइडिंग में चालक के रूप में कार्यरत थे। बुधवार दोपहर भोजन करने के बाद वह अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। इसी दौरान करीब तीन बजे साइडिंग परिसर में संचालित एक पेलोडर मशीन का अगला पहिया उनके सिर पर चढ़ गया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने वाहन रुकवाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी मशीनों के संचालन के दौरान पर्याप्त सुरक्षा घेरा और निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए थी। यदि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाता तो शायद यह हादसा टल सकता था। यह भी सवाल उठ रहा है कि मशीन चलाने से पहले आसपास मौजूद कर्मचारियों की स्थिति का आकलन क्यों नहीं किया गया।
मृतक की बेटी पूजा नायक ने आरोप लगाया कि परिवार को हादसे की जानकारी समय पर नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि जब उनकी मां ने फोन किया तब पुलिस की ओर से अस्पताल पहुंचने को कहा गया, जिसके बाद परिवार को घटना की जानकारी मिली।
घटना की सूचना मिलने पर भदानीनगर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल रामगढ़ भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कार्यस्थल सुरक्षा और प्रबंधन की जवाबदेही की जांच का बड़ा विषय बन गया है।








