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गाजा में गोलीबारी में 85 फिलिस्तीनी मारे गए, इजराइल ने नए निकासी आदेश जारी किए

दीर अल-बलाह, गाजा: गाजा में रविवार को एक भयानक हिंसक घटना घटी, जब मानवीय सहायता के लिए जुटे 85 फिलीस्तीनियों की गोलीबारी में मौत हो गई। यह घटना पिछले 21 महीनों में सहायता प्राप्त करने वालों के लिए सबसे घातक दिन साबित हुई। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस जानकारी की पुष्टि की है।

इसी दौरान, इजराइली सेना ने गाजा के केंद्रीय क्षेत्रों में निकासी आदेश जारी किए हैं, जो अब तक सैन्य अभियान से अपेक्षाकृत अछूते थे। इन क्षेत्रों में कई अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां काम कर रही थीं। रिपोर्टों के अनुसार, कई संगठनों को तुरंत अपने कार्यालय खाली करने के लिए कहा गया है।

उत्तरी गाजा में मौतों की संख्या अधिक

उत्तर गाजा, जो पहले से ही भारी तबाही, भुखमरी और स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है, अब एक और बड़े संकट का सामना कर रहा है। वहाँ ज़िकिम क्रॉसिंग के पास सहायता के लिए जुटी भीड़ पर इजराइली सेना ने गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 79 फिलीस्तीनी मारे गए। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के रिकॉर्ड विभाग प्रमुख ज़ाहर अल-वाहेदी ने बताया कि इस समय संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के 25 ट्रक खाद्य और अन्य सहायता लेकर वहाँ पहुंचे थे, और उसी वक्त भारी भीड़ जमा हो गई थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुभव

घटनास्थल पर मौजूद कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने अपनी दहशत भरी आपबीती साझा की। ईहाब अल-ज़ेई, जो आटा लेने के लिए वहाँ पहुंचे थे, ने बताया, “अचानक चारों ओर टैंक आ गए और गोलियों और हमलों के बीच हम दो घंटे तक फंसे रहे। अब मैं दोबारा कभी नहीं जाऊंगा। भूख से मरना बेहतर है।” इस घटना ने न केवल गाजा की स्थिति को और गंभीर बना दिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक गहरी चिंता का विषय बन गया है।

एक अन्य घायल नागरिक, नाफिज अल-नज्जार ने कहा कि टैंक और ड्रोन ने “लोगों को बेतरतीब तरीके से निशाना बनाया,” और उन्होंने अपने चचेरे भाई को मारा हुआ देखा। यह स्थिति गाजा के नागरिकों के लिए किसी गंभीर युद्ध जैसी परिस्थितियों का प्रतीक बन चुकी है, जहां वे न केवल सैन्य हमलों से जूझ रहे हैं, बल्कि मानवीय सहायता प्राप्त करने के लिए भी अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

इजराइली सेना का बयान

इजराइली सेना ने एक बयान जारी कर कहा कि उत्तरी गाजा में हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी, जो सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी, और इस कारण से सैनिकों को फायरिंग करनी पड़ी। हालांकि, सेना ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ लोग हताहत हुए हैं, लेकिन उसने गाजा अधिकारियों द्वारा बताए गए आंकड़ों को “अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया” कहा।

इसके साथ ही, इजराइली सेना ने हमास पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे जानबूझकर अराजकता फैला रहे हैं। सेना का कहना था कि यह भीड़ जानबूझकर स्थिति को और भड़काने के लिए जुटाई गई थी, और उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिंसा को बढ़ावा देने में हमास का हाथ है।

अन्य घटनाएं

रफाह के शकूश इलाके में भी 6 अन्य फिलीस्तीनी नागरिकों की मौत हुई। यह इलाका अमेरिका और इजराइल द्वारा समर्थित गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन के वितरण केंद्र के पास स्थित है, जो प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाने का काम कर रहा था। इसके अलावा, खान यूनिस में शरण ले रहे 7 अन्य लोगों की भी मौत हुई, जिनमें एक 5 वर्षीय बच्चा भी शामिल था। यह जानकारी कुवैत स्पेशलाइज्ड फील्ड हॉस्पिटल ने दी।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, कुल मिलाकर 150 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है। अस्पतालों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है, और लोग एक दूसरे की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और स्थिति की जटिलता

गाजा में हिंसा की इस बढ़ती लहर के बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता का माहौल है। संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठन, और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां बार-बार मानवीय संकट को हल करने के लिए तात्कालिक कदम उठाने की मांग कर रही हैं। गाजा में आम नागरिकों की मौतों और मानवीय सहायता की स्थिति को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है, लेकिन जमीन पर युद्ध की परिस्थितियां और सुरक्षा मुद्दे इसके समाधान में बाधा डाल रहे हैं।

इजराइल के साथ संघर्ष में घिरे फिलीस्तीनी नागरिकों के लिए सहायता पहुंचाना अब एक और चुनौती बन चुकी है। जहाँ एक ओर इजराइली सेना सुरक्षा कारणों से आपातकालीन निकासी आदेश जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर मानवीय सहायता एजेंसियों के लिए यह संघर्ष कई और जीवन बचाने के प्रयासों की चुनौती पेश कर रहा है।

इस संकट को हल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव और कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि जल्द से जल्द हिंसा में कमी आ सके और आम नागरिकों को राहत मिल सके।

क्या समाधान संभव है?

गाजा में युद्ध और संघर्ष का समाधान कोई आसान काम नहीं है। इजराइल और फिलीस्तीन के बीच का यह संघर्ष दशकों पुराना है, और इसे सुलझाना पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, वैश्विक दबाव और संयुक्त प्रयास से, शायद इस संघर्ष को और अधिक रक्तपात से बचाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए ठोस कदमों की आवश्यकता है जो मानवाधिकारों, सुरक्षा और मानवीय सहायता के पक्ष में हों।

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