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600 शिक्षाविद एक मंच पर: पंच परिवर्तन और भारतीय शिक्षा पर हुआ राष्ट्रीय मंथन

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वावधान में 26 से 28 दिसंबर 2025 तक सूरत स्थित एसवीएनआईटी एवं वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में देशभर से 600 से अधिक शिक्षाविदों, प्रोफेसरों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्स्थापन, मूल्य आधारित शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार पर सार्थक विमर्श करना रहा।

कार्यशाला के दौरान “एक राष्ट्र, एक नाम : भारत” सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें देश के 23 विश्वविद्यालयों को उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समापन सत्र को संबोधित करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि पंच परिवर्तन कोई नया विचार नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन पद्धति का मूल तत्व रहा है। उन्होंने शिक्षा प्रणाली को भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और राष्ट्रीय दृष्टि से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान न्यास की आगामी योजनाओं की भी घोषणा की गई। इनमें दिल्ली, इंदौर, गुजरात, छत्तीसगढ़ और जयपुर में ‘ज्ञान सभा’ का आयोजन, महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, अंतर्राष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन (9 से 11 जनवरी 2026) तथा चरित्र निर्माण पर राष्ट्रीय कार्यशाला (17 से 19 अप्रैल 2026, हरिद्वार) शामिल हैं।

इस कार्यशाला में 35 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपति और निदेशक उपस्थित रहे। झारखंड से 19 प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी प्रतिभागियों का 1 जनवरी 2026 को हजारीबाग के बड़ा अखाड़ा में स्वागत और सम्मान किया गया। कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि शिक्षा को राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का केंद्र बनाया जाएगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाएगा।

 

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