चितरपुर। रमजान के पाक महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग इबादत में मशगूल हैं, वहीं चितरपुर के बेलाल नगर की छह वर्षीय नन्ही बच्ची जुनैरा हबीब ने अपना पहला रोजा रखकर सबको भावुक कर दिया। छोटी सी उम्र में उसकी आस्था और जज्बे ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
जुनैरा डीएवी रजरप्पा स्कूल में यूकेजी ‘सी’ की छात्रा है। उसके पिता हबीब उल्लाह ने बताया कि इस्लाम धर्म में इतनी कम उम्र के बच्चों पर रोजा रखना अनिवार्य नहीं है। बावजूद इसके जुनैरा ने अपनी इच्छा और श्रद्धा से रमजान का पहला रोजा रखा। परिवार ने भी उसके उत्साह को देखते हुए उसे प्रोत्साहित किया।
दिनभर भूखे-प्यासे रहकर जुनैरा ने पूरी निष्ठा के साथ रोजा पूरा किया और शाम को परिवार के साथ इफ्तार कर रोजा खोला। उसने अल्लाह से दुआ मांगी कि उसे पढ़ाई-लिखाई में अच्छी समझ और ज्ञान मिले तथा वह नेक रास्ते पर चले। मासूम जुनैरा ने अपने माता-पिता के आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हुए पूरे देश में अमन और शांति कायम रहने की भी प्रार्थना की।
जुनैरा ने कहा कि रोजा रखने का मकसद यह है कि उसका अल्लाह उससे राजी हो। उसने आगे भी रमजान के दौरान रोजा रखने और इबादत करने की इच्छा जताई।
रमजान, जिसे Ramadan के नाम से जाना जाता है, मुस्लिम समुदाय के लिए इबादत, संयम और आत्मशुद्धि का महीना माना जाता है। ऐसे में छोटी उम्र में जुनैरा का यह कदम लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।
इलाके के लोगों ने नन्ही रोजेदार की हौसला अफजाई करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।








