रुड़की के मंगलौर क्षेत्र में पवित्र माह रमजान के पहले अशरे के दौरान एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। मंगलौर मोहल्ला किला निवासी शमीम काजमी के सात वर्षीय नवासे अली अहमद काजमी ने इस वर्ष अपना पहला रोजा रखा। कम उम्र में रोजा रखने को लेकर परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल रहा।
रमजान का पहला अशरा रहमतों का पखवाड़ा माना जाता है, जिसमें रोजेदार तरावीह और विशेष नमाज अदा करते हैं। इसी पावन अवसर पर अली अहमद ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ अपना पहला रोजा रखा। खास बात यह रही कि इस खुशी में उसके स्कूल के सहपाठी भी शामिल हुए। उसके मुस्लिम मित्रों के साथ-साथ कुछ हिंदू नन्हे साथियों ने भी उसके इस खास दिन को यादगार बनाने में भागीदारी निभाई। बच्चों ने मिलकर खुशी मनाई और आपसी सौहार्द का संदेश दिया।
अली अहमद के मित्रों ने कहा कि वह हर त्योहार पर सबके साथ मिलकर खुशी मनाता है, इसलिए उसके पहले रोजे की खुशी में शामिल होना उनके लिए खास रहा। यह दृश्य गंगा-जमुनी संस्कृति और आपसी भाईचारे की मिसाल बन गया।
अली अहमद के पिता फुजैल काजमी और माता एडवोकेट मारिया काजमी ने कहा कि बच्चों में धार्मिक संस्कार बचपन से ही विकसित किए जाने चाहिए, चाहे वे किसी भी धर्म से हों। उनका मानना है कि इससे बच्चों में मानवता, सहिष्णुता और राष्ट्रीयता की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि बच्चे फरिश्तों के समान होते हैं और उनमें प्रेम व सद्भाव के बीज बोना समाज की जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर काजी जमाल काजमी, अताए साबिर, अनिल शर्मा, नज्म काजमी, उमर और अहम हुसैन सहित कई लोग मौजूद रहे।








