देहरादून।
इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (इंडिया) लिमिटेड [IGI] ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में दमदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज करते हुए हीरा एवं आभूषण उद्योग में अपनी मजबूत स्थिति को और सुदृढ़ किया है। कंपनी ने कुदरती हीरे, लैब में बने हीरे, आभूषण और रत्न प्रमाणन जैसे सभी प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में शानदार वृद्धि दर्ज की है।
कंपनी के अनुसार, 2025 की चौथी तिमाही में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में **राजस्व में 21 प्रतिशत** और **EBITDA में 26 प्रतिशत** की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान प्रमाणन सेवाओं से होने वाली आय में भी **23 प्रतिशत** की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। तिमाही के दौरान प्रमाणन से कुल राजस्व **3,049 मिलियन रुपये**, जबकि EBITDA **1,913 मिलियन रुपये** तक पहुंच गया। वहीं, **शुद्ध लाभ (PAT)** साल-दर-साल आधार पर **18 प्रतिशत बढ़कर 1,346 मिलियन रुपये** दर्ज किया गया।
पूरे वित्तीय वर्ष के आंकड़ों की बात करें तो दिसंबर 2025 में समाप्त हुए 12 महीनों में संचालन से प्राप्त कुल राजस्व में **17 प्रतिशत** और EBITDA में **23 प्रतिशत** की वृद्धि हुई है। कंपनी का EBITDA मार्जिन दिसंबर 2024 में 56.9 प्रतिशत था, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर **59.9 प्रतिशत** हो गया, जो संचालन दक्षता और मजबूत रणनीति को दर्शाता है।
इस अवसर पर आईजीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ **तेहमास्प प्रिंटर** ने कहा कि कंपनी ने रणनीतिक योजनाओं पर लगातार काम करते हुए सभी व्यावसायिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक हीरों के प्रमाणन में बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है, जबकि **लैब-ग्रोउन डायमंड (LGD)** सर्टिफिकेशन कारोबार में भी तेज़ी आई है। भारत समेत वैश्विक बाजारों में एलजीडी से बने आभूषणों की बढ़ती मांग और स्थिर थोक कीमतें इस वृद्धि का प्रमुख कारण हैं।
उद्योग के रुझानों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ग्राहकों की बदलती पसंद, तकनीकी प्रगति और प्रमाणन की बढ़ती आवश्यकता के कारण हीरा एवं आभूषण बाजार तेजी से विकसित हो रहा है। किफायती और सस्टेनेबल विकल्प होने के कारण लैब में बने हीरों की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है। ऐसे परिवेश में स्वतंत्र और विश्वसनीय प्रमाणन की भूमिका और भी अहम हो गई है, जहां आईजीआई अपनी लीडरशिप के साथ अग्रणी बना हुआ है।








