संयुक्त राष्ट्र/तेहरान:
ईरान ने बुधवार को संकेत दिया है कि अगर यूरोपीय देशों ने उस पर फिर से प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया, तो वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने वाला दूसरा देश बन सकता है। यह बयान ईरान के उप विदेश मंत्री और वरिष्ठ परमाणु वार्ताकार काजेम गरीबाबादी ने दिया, जब राजनयिक माहौल तनावपूर्ण हो गया था, खासकर ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के साथ शुक्रवार को होने वाली अहम बैठक से पहले।
गरीबाबादी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “अगर स्नैपबैक प्रावधान के तहत प्रतिबंध फिर से लगाए जाते हैं, तो ईरान संयम नहीं बरतेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब तक 1970 की परमाणु अप्रसार संधि का पालन करता आया है, लेकिन देश के भीतर से इस संधि से हटने का दबाव लगातार बढ़ रहा है, खासकर हालिया इजराइली और अमेरिकी हमलों के बाद।
यूरोपीय देशों के प्रति ईरान का संदेश
गरीबाबादी ने यूरोपीय देशों को एक स्पष्ट संदेश दिया, “अगर यूरोप की नीतियां अमेरिका के अनुरूप ही होंगी, तो हमारे लिए उनके साथ बातचीत का क्या अर्थ रह जाएगा? फिर हम सीधे अमेरिका से ही क्यों न बात करें?” उनका यह बयान उस संदर्भ में था जब यूरोपीय देशों ने ईरान पर प्रतिबंधों के पुनः लागू करने की धमकी दी है, अगर अगस्त तक परमाणु समझौते को लेकर कोई प्रगति नहीं होती।
ईरान के अधिकारी स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि अगर यूरोप ने अमेरिका के साथ मिलकर प्रतिबंध लगाए, तो ईरान के लिए उनके साथ बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। गरीबाबादी ने कहा कि राजनयिक प्रयासों और संवाद से इस संकट को टाला जा सकता है, लेकिन इसके लिए यूरोप को स्वतंत्र रुख अपनाना होगा और अमेरिका के दबाव में नहीं आना होगा।
परमाणु समझौते का संकट
यह संकट 2015 के परमाणु समझौते से जुड़ा हुआ है, जिसे ईरान ने अमेरिका और अन्य देशों के साथ मिलकर हस्ताक्षर किया था। हालांकि, 2018 में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एकतरफा रूप से इस समझौते से बाहर निकलने का निर्णय लिया, जिसके बाद से ईरान पर प्रतिबंध लगाए गए और उसकी परमाणु गतिविधियां पुनः तेज हो गईं।
अमेरिका अब फिर से ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई डील की कोशिशें कर रहा है, लेकिन यूरोपीय देशों ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर अगस्त तक कोई प्रगति नहीं होती, तो वे उसे फिर से आर्थिक प्रतिबंध लगा सकते हैं।
ईरान का दावा: शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु कार्यक्रम
ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम हमेशा शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियारों के विकास में नहीं लगा है। हालांकि, पश्चिमी देश और खासकर अमेरिका, इस पर विश्वास नहीं करते और उनका मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम संभावित रूप से सैन्य उद्देश्य को भी पूरा कर सकता है। ईरान ने इस आरोप को बार-बार नकारा है।
एनपीटी से बाहर जाने का खतरा
ईरान ने पहले भी यह संकेत दिया था कि अगर उसकी बातचीत और समझौतों का कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता, तो वह एनपीटी से बाहर निकल सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो ईरान उत्तर कोरिया (2003) के बाद दूसरा देश होगा, जो परमाणु अप्रसार संधि से बाहर जाने की घोषणा करेगा।
अगले कदम क्या होंगे?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची और काजेम गरीबाबादी दोनों ने उम्मीद जताई है कि शुक्रवार की बैठक में कोई समाधान निकल सकता है, जिससे प्रतिबंधों और संधि से बाहर निकलने की नौबत टल सके। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि यूरोपीय देश ईरान के दबाव को कैसे लेते हैं और क्या वे अमेरिका के साथ अपने रिश्तों में बदलाव करेंगे।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बनी इस नाजुक स्थिति में, दोनों पक्षों के लिए एक संतुलित और राजनयिक समाधान का खोजना बहुत अहम हो सकता है, ताकि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरे को टाला जा सके।










